Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer

Class 10th Hindi पाठ -1 श्रम विभाजन और जाति-प्रथा Subjective Question 2023- Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer 2023

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे बिहार बोर्ड Class 10th का हिंदी – 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथाShram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer के जितने भी प्रश्न उत्तर है और objective और subjective जितने भी questions answer हैं सभी को इस आर्टिकल में दिए हैं इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha – सारांश

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha – सारांश – श्रम विभाजन और जाति प्रथा में लेखक ने जातीय आधार पर की जाने वाली असमानता के विरुद्ध अपना विचार प्रकट किया है लेखक का कहना है कि आज के परिवेश में भी कुछ जातिवाद के कटु समर्थक है इनके अनुसार कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन आवश्यक है क्योंकि जाति प्रथा श्रम विभाजन का ही एक दूसरा रूप है लेकिन लेखक की आपत्ति है जातिवाद श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का रूप के लिए श्रम विभाजन किसी भी सभ्य समाज के लिए आवश्यक है किंतु भारत के जाति प्रथा श्रमिकों का स्वाभाविक विभाजन करती है और इन विभिन्न वर्गों के एक दूसरों की अपेक्षा ऊंच-नीच भी करार देती है Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer

श्रम विभाजन मान भी लिया जाए तो यह स्वाभाविक नहीं है क्योंकि यह मनुष्य की रूचि पर आधारित नहीं है इसीलिए समक्ष समाज का कर्तव्य है कि वह व्यक्तियों के अपने रुचियां क्षमता के अनुसार पेशा अथवा कार्य चुनने के योग्य बनाए

इस सिद्धांत के विपरीत जाति प्रथा का दूषित सिद्धांत यह है कि उस से मनुष्य की माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार पेशा अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है और जाति प्रथा पेशा का पूर्व निर्धारण ही नहीं करती बल्कि जीवन भर के लिए मनुष्य को एक ही पेशा में बांध भी देती है
इसके कारण किसी उद्योग धंधे या तकनीक के परिवर्तन हो जाता है लोगों के भूखे मरने के अलावा कोई भी चारा नहीं रहता है क्योंकि खास पेशा के बंधे होने के कारण वह बेरोजगार हो जाता है Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer

जाति प्रथा से किया गया श्रम विभाजन किसी की सुरक्षा पर निर्भर नहीं होता जिसके कारण लोग निर्धारित कार्य को और उसी के साथ विवशता वक्त करते हैं इस प्रकार जाति प्रथा व्यक्ति के स्वाभाविक प्रेरणा रुचि व आत्मशक्ति को दबाकर इन्हें स्वाभाविक नियमों के जकड़ कर निष्क्रिय बना देती है
समाज के रचनात्मक पहलू पर विचार करते हुए लेखक कहते हैं की आदत समाज वह है जिसे स्वतंत्रता समझता मात्र को महत्व क्या जा रहा हो Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha – लेखक परिचय

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha – लेखक परिचय – श्रम विभाजन और जाति प्रथा का लेखक डॉक्टर भीमराव अंबेडकर है भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ईस्वी में हुआ था मध्यप्रदेश के महू में हुआ था भीमराव अंबेडकर उच्च शिक्षा के लिए न्यूयॉर्क अमेरिका फिर वहां से लंदन गए कुछ दिनों तक वकालत करने के बाद राजनीतिक में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इन्होंने अछूतों को स्त्रियों तथा मजदूरों को मानवीय अधिकार तथा सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का मृत्यु 6 सितंबर 1956 ईस्वी में हुआ

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha प्रश्न – उत्तर

प्रश्न – लेखक किस विडंबना की बात करते हैं? विडंबना का स्वरूप क्या है?

उत्तर – लेखक महोदय आधुनिक युग में भी “जातिवाद” के पुस्तकों की कमी नहीं है जिससे विडंबना करते हैं विडंबना का स्वरूप यह है कि आधुनिक सभ्य समाज “कार्य – कुशलता” के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है क्योंकि जाति प्रथा का श्रम विभाजन का ही होना दूसरा रूप है इसीलिए इसमें कोई बुराई नहीं है

प्रश्न – जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?

उत्तर – भारतीय समाज में जाति श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप नहीं कही जा सकती है श्रम विभाजन के नाम पर श्रमिकों का विभाजन है श्रमिकों के बच्चों को अनिच्छा से अपने बपौती काम करना पड़ता है जो आधुनिक समाज के लिए स्वाभाविक रूप नहीं है

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